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AI-Generated Fake Video/Voice Scams & Fraud 2025 – भारत में कैसे पहचानें और सुरक्षित रहें

: 2025 में AI स्कैम्स की लहर क्यों बढ़ रही है? AI scams India 2025

2025 का साल आते-आते Generative AI टूल्स इतने सुलभ और शक्तिशाली हो गए हैं कि अब वे हमारी जेब में मौजूद स्मार्टफोन से भी चल सकते हैं। जिस तकनीक ने कल तक क्रिएटर्स के लिए नए आसमान खोले थे, उसी तकनीक का अंधेरा पहलू AI-जनित स्कैम और फ्रॉड के रूप में सामने आ रहा है। भारत में, जहां डिजिटल भुगतान और सोशल मीडिया का विस्तार तेजी से हुआ है, वहां यह खतरा और भी गंभीर हो जाता है।

आज, मात्र 500 रुपये और 10 मिनट में कोई भी आपकी आवाज का क्लोन बना सकता है या आपके चेहरे को किसी ऐसे वीडियो में डाल सकता है जो आपने कभी बनाया ही नहीं। स्थिति 2025 में चिंताजनक है क्योंकि इन स्कैम्स का लक्ष्य अब सिर्फ सेलेब्रिटी नहीं, बल्कि आम नागरिक, छोटे व्यवसायी और यहां तक कि आपके परिवार के सदस्य भी हैं। यह लेख आपको इन नए जमाने के धोखेबाजों से बचने का पूरा हथियार देगा – जागरूकता का।


1: AI Scams के सामान्य प्रकार – जानें दुश्मन को

  1. डीपफेक वीडियो स्कैम:
    1. क्या है: किसी के चेहरे और आवाज को किसी दूसरे वीडियो में रिप्लेस कर देना। जैसे, एक नेता को गलत बयान देते हुए दिखाना, या किसी सीईओ को निवेशकों से पैसा मांगते हुए दिखाना।
    1. उदाहरण: “अमिताभ बच्चन ने क्रिप्टोकरेंसी स्कीम का विज्ञापन किया” जैसी फर्जी खबर वाला वीडियो।
  2. फेक वॉयस कॉल स्कैम (क्लोनिंग):
    1. क्या है: किसी प्रियजन (बेटे, बेटी, रिश्तेदार) की आवाज का AI क्लोन बनाकर फोन पर मदद के नाम पर पैसे मांगना। यह स्कैम भारत में तेजी से बढ़ रहा है।
    1. उदाहरण: “पापा, मैं एक्सीडेंट में फंस गया हूं, जल्दी से 50,000 रुपये भेजो।” आवाज बिल्कुल असली लगती है।
  3. फ्रॉड AI विज्ञापन और एंडोर्समेंट:
    1. क्या है: सेलेब्रिटी या इन्फ्लुएंसर के डीपफेक वीडियो बनाकर नकली प्रोडक्ट्स (हेल्थ सप्लीमेंट, इन्वेस्टमेंट स्कीम) का विज्ञापन करना।
    1. उदाहरण: YouTube पर “शाहरुख खान ने इस नए क्रिप्टो टोकन की तारीफ की” जैसे झूठे एड।
  4. AI-जनित फेक रिव्यू और रेटिंग्स:
    1. क्या है: AI से लिखे गए सैकड़ों पॉजिटिव या नेगेटिव रिव्यू किसी प्रोडक्ट, होटल या पॉलिटिशियन की इमेज बनाने-बिगाड़ने के लिए।
    1. उदाहरण: किसी नई कंपनी के ऐप को प्ले स्टोर पर एक रात में 5000 5-स्टार रिव्यू मिल जाना।
  5. डॉक्यूमेंट और इमेज फर्जीवाड़ा:
    1. क्या है: AI टूल्स से फर्जी बैंक स्टेटमेंट, मेडिकल रिपोर्ट्स या फोटोज जेनरेट करना लोन फ्रॉड या ब्लैकमेलिंग के लिए।

2: कैसे पहचानें? 7 प्रैक्टिकल टिप्स

  1. आवाज में “रोबोटिक टोन” और अप्राकृतिक सांसें: AI वॉयस अक्सर बहुत परफेक्ट होती है। सुनें – क्या सांस लेने की आवाजें हैं? बोलने की गति में कोई असामान्य बदलाव? क्या भावनाएं असली लग रही हैं? अक्सर AI इमोशनल पलों में फ्लैट रहती है।
  2. चेहरे और होंठों की गति पर नजर: डीपफेक वीडियो में अक्सर होंठों की हलचल और बोले गए शब्दों में सिंक की कमी होती है। आंखों के ब्लिंक करने की प्राकृतिक रिदम गायब हो सकती है।
  3. रिवर्स इमेज/वीडियो सर्च जरूर करें:
    1. वीडियो का एक स्क्रीनशॉट लें।
    1. Google Images पर जाकर कैमरा आइकन पर क्लिक कर उसे अपलोड करें।
    1. देखें कि क्या वही इमेज या वीडियो पुरानी खबरों या अलग कंटेक्स्ट में मिल रहा है। यह सबसे आसान तरीका है।
  4. मेटाडेटा चेक करें (टेक्निकल तरीका):
    1. किसी भी वीडियो या इमेज फाइल को मेटाडेटा व्यूअर वेबसाइट (जैसे Metapicz.com) या कंप्यूटर के प्रॉपर्टीज में डालकर देखें।
    1. “क्रिएशन डेट”, “सॉफ्टवेयर” या “कैमरा मॉडल” जैसी जानकारी देखें। अगर कोई AI टूल (जैसे “Stable Diffusion”, “RunwayML”) का नाम लिखा है, तो यह AI-जनित है।
  5. स्रोत को वेरीफाई करें – हमेशा!
    1. क्या वीडियो किसी आधिकारिक न्यूज चैनल या व्यक्ति के वेरिफाइड सोशल मीडिया हैंडल से आ रहा है?
    1. अगर कोई WhatsApp फॉरवर्ड है, तो उसके मूल स्रोत तक जाने की कोशिश करें। “एक दोस्त ने भेजा है” को स्रोत न मानें।
  6. संदेश की भाषा और अति-आकर्षक ऑफर पर शक करें:
    1. AI स्कैम अक्सर तत्काल एक्शन (Urgency) पर जोर देते हैं। “अभी ट्रांसफर करो, नहीं तो…” या “सिर्फ आज के लिए यह ऑफर” जैसे वाक्य Red Flag हैं।
    1. ग्रामर और वाक्य संरचना बहुत ज्यादा परफेक्ट या फिर अजीब हो सकती है।
  7. AI डिटेक्शन टूल्स का इस्तेमाल करें (अतिरिक्त सुरक्षा):
    1. Hive Moderation, Deepware Scanner, Intel’s FakeCatcher जैसे टूल ऑनलाइन मौजूद हैं जो डीपफेक की पहचान में मदद करते हैं। हालांकि, ये 100% सटीक नहीं हैं, लेकिन एक क्लू जरूर दे सकते हैं।

3: क्या कहता है भारत का कानून?

फिलहाल, भारत में AI-स्पेसिफिक कोई कानून नहीं है, लेकिन मौजूदा कानूनों के तहत AI स्कैम पर कार्रवाई की जा सकती है:

  • IT Act, 2000 (धारा 66D): किसी की पहचान छुपाकर धोखाधड़ी करना दंडनीय अपराध है। डीपफेक इसी श्रेणी में आता है।
  • कॉपीराइट एक्ट, 1957: बिना अनुमति किसी की छवि या आवाज का व्यावसायिक उपयोग करना कॉपीराइट उल्लंघन है।
  • IPC की धाराएं (416, 419, 420): धोखाधड़ी (Cheating) और व्यक्तित्व अपहरण (Personation) के लिए सजा का प्रावधान।
  • नए प्रस्ताव: सरकार डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट, 2023 और भविष्य के डिजिटल इंडिया एक्ट के तहत AI मिसयूज को रेगुलेट करने पर काम कर रही है।
  • गुरुत्वपूर्ण कदम: भारतीय दंड संहिता (IPC) में धारा 509B जोड़ने का प्रस्ताव है, जो विशेष रूप से डीपफेक पोर्नोग्राफी को सजा देने के लिए होगी।

आपका अधिकार: अगर आप AI स्कैम का शिकार हुए हैं, तो आप https://cybercrime.gov.in पर जाकर या हैल्पलाइन 1930 पर फोन करके शिकायत दर्ज करा सकते हैं।


4: व्यूअर्स और क्रिएटर्स के लिए बेस्ट सेफ्टी प्रैक्टिसेज

दर्शकों/उपयोगकर्ताओं के लिए:

  1. शेयर करने से पहले सत्यापन (Verify Before You Share): यह सुनहरा नियम है। किसी भी सनसनीखेज वीडियो को फॉरवर्ड करने से पहले 2 मिनट रुकें और उपरोक्त टिप्स का इस्तेमाल करके चेक करें।
  2. दो-चरणीय सत्यापन (2FA) जरूर लगाएं: अपने सभी महत्वपूर्ण अकाउंट्स (बैंक, ईमेल, सोशल मीडिया) पर 2FA एक्टिवेट करें ताकि हैकर्स आपकी आवाज क्लोन करके भी एक्सेस न पा सकें।
  3. परिवार से एक सीक्रेट कोडतय करें: परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर एक गुप्त सवाल या कोड वर्ड तय कर लें, जो फोन पर पैसे मांगने वाले किसी भी इमरजेंसी कॉल में पूछा जा सके। “हमारे पालतू कुत्ते का नाम क्या है?” जैसा सवाल AI को नहीं पता होगा।

क्रिएटर्स/इन्फ्लुएंसर्स के लिए:

  1. वॉटरमार्क और डिस्क्लेमर: अपने ओरिजिनल वीडियो पर दृश्य वॉटरमार्क (छोटा लोगो) लगाएं और डिस्क्रिप्शन में लिखें कि आपके ऑफिशियल अकाउंट्स कौन-से हैं।
  2. डिजिटल फिंगरप्रिंटिंग: YouTube और Facebook जैसे प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट आईडी या डिजिटल फिंगरप्रिंटिंग सिस्टम का उपयोग करें, जो आपके कंटेंट की नकल होने पर ऑटोमैटिकली उसे डिटेक्ट और ब्लॉक कर दे।
  3. नियमित रिवर्स सर्च: अपने नाम और ब्रांड से जुड़े वीडियो/इमेज की रिवर्स सर्च करते रहें ताकि कोई फेक कंटेंट पकड़ में आ सके।

5: अगर आप एक ब्रांड हैं – स्कैमर्स से कैसे बचें और ट्रस्ट बनाएं

ब्रांड्स AI स्कैम के जरिए नकली एंडोर्समेंट या फर्जी ऑफर्स देकर निशाना बनाए जा रहे हैं। सुरक्षा के उपाय:

  1. ट्रैडमार्क और सोशल मीडिया अकाउंट्स सुरक्षित रखें: अपने ब्रांड नाम के सभी सोशल मीडिया हैंडल्स (ट्विटर, इंस्टा, FB) पहले से ही रजिस्टर करके रखें, ताकि कोई फर्जी अकाउंट न बना सके।
  2. ग्राहक शिकायतों को गंभीरता से लें: अगर कोई ग्राहक कहता है कि “आपके नाम पर कोई स्कैम चल रहा है”, तो तुरंत जांच शुरू करें और एक ऑफिशियल चेतावनी जारी करें।
  3. AI मॉनिटरिंग टूल्स इन्वेस्ट करें: Brandwatch, Mention जैसे टूल्स से अपने ब्रांड के नाम का ऑनलाइन मॉनिटरिंग करें। AI-पावर्ड टूल्स अब फर्जी रिव्यू और नकली खबरों को भी पकड़ सकते हैं।
  4. ट्रांसपेरेंसी बनाए रखें: अपनी ऑफिशियल वेबसाइट और सोशल मीडिया पर स्पष्ट रूप से बताएं कि आप कभी भी फोन/WhatsApp पर अप्रत्याशित रूप से पैसे या OTP नहीं मांगते।
  5. साइबर इंश्योरेंस लें: बड़े ब्रांड्स के लिए साइबर अटैक या AI-फ्रॉड से होने वाले नुकसान के खिलाफ इंश्योरेंस लेना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है।

6: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या वास्तव में मेरी आवाज का क्लोन बनाया जा सकता है? कितना आसान है?
A: हां, बिल्कुल। ElevenLabs जैसे टूल्स के साथ, सिर्फ 30 सेकंड की क्लियर ऑडियो रिकॉर्डिंग से आपकी आवाज का यथार्थवादी क्लोन बन सकता है। यह बहुत आसान और सस्ता हो गया है।

Q2. मुझे AI स्कैम का शिकार होने का शक है। सबसे पहले मुझे क्या करना चाहिए?
A: 1. तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें अगर पैसे ट्रांसफर हुए हैं।
2. https://cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
3. अपने सोशल मीडिया पर एक अलर्ट जारी करें ताकि दूसरे सावधान हो सकें।
4. फर्जी वीडियो/पोस्ट की प्लेटफॉर्म (Facebook, YouTube) से शिकायत करके हटवाएं।

Q3. क्या WhatsApp पर आने वाले ऑडियो नोट भी फेक हो सकते हैं?
A: हां! AI टूल्स अब ऑडियो क्लोनिंग करके उसे WhatsApp ऑडियो नोट के फॉर्मेट में भी सेव कर सकते हैं। किसी अप्रत्याशित ऑडियो नोट पर भी शक करें और कोड वर्ड से वेरीफाई करें।

Q4. AI डिटेक्शन टूल्स कितने भरोसेमंद हैं?
A: अभी 100% भरोसेमंद नहीं हैं। AI जनरेट करने वाले और डिटेक्ट करने वाले टूल्स के बीच एक “आर्म्स रेस” चल रही है। ये टूल्स संकेत दे सकते हैं, लेकिन अंतिम फैसला आपकी समझदारी और अन्य टिप्स पर ही होना चाहिए।

Q5. क्या मेरी सोशल मीडिया फोटो से कोई डीपफेक बना सकता है?
A: हां, सार्वजनिक प्रोफाइल पिक्चर्स की गुणवत्ता अक्सर डीपफेक बनाने के लिए काफी होती है। अपनी फोटोज की प्राइवेसी सेटिंग को सख्त रखें और अजनबियों के लिए सब कुछ ओपन न छोड़ें।

Q6. भविष्य में AI स्कैम से बचने के लिए टेक्नोलॉजी क्या समाधान ला सकती है?
A: डिजिटल वॉटरमार्किंग (AI द्वारा जेनरेट की गई हर फाइल में एक अदृश्य डिजिटल सिग्नेचर), ब्लॉकचेन-आधारित स्रोत सत्यापन, और बायोमेट्रिक लाइवनेस डिटेक्शन (वीडियो कॉल में असली इंसान की पहचान) जैसी तकनीकें विकसित की जा रही हैं।


2025 में, हमारी सबसे बड़ी ताकत और सबसे बड़ी कमजोरी एक ही है – तकनीक। AI स्कैम्स एक गंभीर खतरा हैं, लेकिन जागरूकता और सतर्कता हमारा सबसे मजबूत कवच है। इन स्कैम्स का मकसद हमारा पैसा ही नहीं, बल्कि हमारा विश्वास और सामाजिक सद्भाव भी है।

आज ही एक कदम उठाएं: अगली बार जब कोई संदेहास्पद वीडियो, ऑडियो या मैसेज आपके सामने आए, तो बिना सोचे-समझे शेयर करने की बजाय, रुकें, सोचें और सत्यापित करें। अपने बुजुर्ग माता-पिता और कम डिजिटल समझ रखने वाले परिजनों को भी इन साधारण टिप्स के बारे में जरूर बताएं।

याद रखें: एक जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनना केवल अपनी सुरक्षा नहीं, बल्कि पूरे डिजिटल इकोसिस्टम की सुरक्षा है। शेयर करने से पहले सत्यापन अवश्य करें।

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Rahul Mishra Online
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